राजनांदगांव। नन्हाटोला-गैंदाटोला क्षेत्र में मुख्य मार्ग से शराब भट्ठी हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों और महिलाओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। 14 मई से शुरू हुआ यह धरना प्रदर्शन आज तक जारी है, जिसमें दर्जनों गांवों की महिलाएं राशन-पानी के साथ धरने पर बैठी हुई हैं। आंदोलन को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर शराब भट्ठी संचालित हो रही है, वहां से रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं और स्कूली बच्चे आवागमन करते हैं। शराब दुकान के कारण आए दिन असामाजिक गतिविधियों और अव्यवस्था की स्थिति बनती है, जिससे ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं और बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए लंबे समय से शराब भट्ठी को मुख्य मार्ग से हटाने की मांग की जा रही है।
बताया जा रहा है कि पूर्व में ग्रामीण महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद आबकारी विभाग ने शराब भट्ठी को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए टेंडर भी जारी किया था, लेकिन कुछ लाभार्थी समूह और समिति से जुड़े लोग भट्ठी हटाने के पक्ष में नहीं हैं। आंदोलनकारी महिलाओं का आरोप है कि कुछ तथाकथित लोग प्रशासन पर दबाव बनाकर शराब भट्ठी को उसी स्थान पर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
आंदोलन को समर्थन देने के लिए खुज्जी के पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू लगातार ग्रामीणों और महिलाओं के बीच पहुंच रहे हैं। उन्होंने आंदोलनरत महिलाओं की मांग को जायज बताते हुए कहा कि गांव की माताओं-बहनों और बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। पूर्व विधायक के समर्थन से आंदोलन को और मजबूती मिली है।
इधर आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए ग्रामीण रोजाना लगभग 500 लोगों के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर चावल और राशन एकत्र किया जा रहा है ताकि आंदोलन लगातार जारी रह सके। आंदोलन को हिन्दू आदिवासी समाज, प्रदेश किसान संघ, जिला किसान संघ राजनांदगांव, श्री मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्था एवं सतनाम समाज सहित विभिन्न संगठनों का समर्थन प्राप्त हो रहा है।
हालांकि आंदोलन के बीच कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पूर्व विधायक छन्नी चंदू साहू के खिलाफ नारेबाजी और पुतला दहन भी किया गया, लेकिन इसके बावजूद वे लगातार आंदोलनरत महिलाओं और ग्रामीणों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीति का नहीं, बल्कि गांव की सुरक्षा और भविष्य का मुद्दा है।


