खैरागढ़। पिछले कुछ दिनों से खैरागढ़ की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब कुछ अखबारों और वेब पोर्टलों पर पूर्व विधायक कोमल जंघेल Komal Janghel के खिलाफ कथित यौन शोषण व दुष्कर्म के मामले में एफआईआर दर्ज होने की खबरें प्रसारित की गईं। यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।
हालांकि, कोमल जंघेल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से झूठी खबरें फैलाई गई हैं। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित प्रयास है, जिससे उनके जनाधार और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, छुईखदान थाने में इस प्रकार की किसी भी एफआईआर के दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद लगातार कई दिनों तक विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इस आशय की खबरें चलती रहीं। इस दौरान पुलिस प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक खंडन सामने नहीं आने से भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।
इधर, किसान अधिकार संघर्ष समिति द्वारा जारी बयान में भी कथित एफआईआर और आरोपों को भ्रामक बताया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि किसी महिला पदाधिकारी के नाम से प्रकरण दर्ज कराने की जो चर्चा चल रही थी, वह तथ्यहीन है।
पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के इस प्रकार की गंभीर खबरें किस आधार पर चलाई गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को इस तरह नुकसान न पहुंचे।
फिलहाल, पूर्व विधायक ने कहा है कि वे सच्चाई सामने लाने के लिए हर वैधानिक कदम उठाने को तैयार हैं। खैरागढ़ की राजनीति में यह प्रकरण आने वाले दिनों में और भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
किसान अधिकार संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी या सदस्य ने यौन उत्पीड़न संबंधी कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। एक पदाधिकारी को व्हाट्सऐप पर मिली धमकी और एआई एडिटेड फोटो के मामले में आईटी व धमकी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई है। समिति ने झूठी खबरें फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।


