खैरागढ़। ‘ज्ञान भारतम पाण्डुलिपि सर्वेक्षण’ अभियान के अंतर्गत कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के केंद्रीय ग्रंथालय का निरीक्षण कर वहां संरक्षित हस्तलिखित पांडुलिपियों का अवलोकन किया।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने प्राचीन पांडुलिपियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताते हुए उनके संरक्षण, संवर्धन और डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ग्रंथालय में उपलब्ध पांडुलिपियों की स्थिति, रख-रखाव, वर्गीकरण और संरक्षण व्यवस्था की विस्तार से जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि ये पांडुलिपियां न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि शोध और अकादमिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं। ऐसे में इनका वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और डिजिटल अभिलेखीकरण जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ज्ञान संपदा से लाभान्वित हो सकें।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों और ग्रंथालय प्रबंधन को निर्देशित किया कि पांडुलिपियों की सूची तैयार कर उन्हें विषय, भाषा और कालखंड के अनुसार वर्गीकृत किया जाए। साथ ही, विशेषज्ञों की मदद लेकर उन्नत संरक्षण तकनीकों को अपनाने के निर्देश दिए गए। पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाने पर भी जोर दिया गया, जिससे शोधार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से इनका लाभ मिल सके।
इस दौरान एडिशनल कलेक्टर सुरेंद्र कुमार ठाकुर, एसडीएम टंकेश्वर साहू, डॉ. जितेंद्र साखरे, डॉ. मंगलानंद झा एवं पुस्तकालय प्रभारी डॉ. जे. मोहन सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने पांडुलिपियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति जताई।


