खैरागढ़।गंडई थाना क्षेत्र अंतर्गत कटंगी निवासी शीतलाल का मामला एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि शीतलाल पिछले कई वर्षों से सामाजिक बहिष्कार की पीड़ा झेल रहे थे। इस संबंध में उन्होंने थाना, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर सहित मानव अधिकार आयोग तक कई बार आवेदन दिए, लेकिन लगभग दस वर्षों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
लगातार अनदेखी और मानसिक तनाव के चलते शुक्रवार को शीतलाल खैरागढ़ कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें बचा लिया और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
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चिकित्सकों के अनुसार शीतलाल की हालत अब स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। फिलहाल उनका इलाज जारी है।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। यह मामला न केवल सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथा, बल्कि लंबे समय से लंबित शिकायतों और मानसिक उत्पीड़न को भी उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।


