खैरागढ़। जिले की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शिक्षकों को संलग्न किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान परिषद के कार्यकर्ताओं ने विद्यार्थी हित से जुड़ी सात सूत्रीय मांगों को लेकर प्रभारी सहायक संचालक मनोहर लाल चंदेल को ज्ञापन सौंपा।
ABVP ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो विद्यार्थी हित में खैरागढ़ में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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परिषद के नगर मंत्री रितिक कंडरा ने कहा कि जिले के कई सरकारी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न रखे जाने से स्कूलों में शिक्षकों की कमी और गंभीर हो रही है। ऐसे में शिक्षकों को कार्यालयीन कार्यों से मुक्त कर वापस विद्यालयों में भेजना जरूरी है।
सात सूत्रीय मांगों में क्या-क्या शामिल?
ABVP ने जिले के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी तत्काल दूर करने, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में वापस भेजने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नियमित शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अलावा स्कूलों में भवन, अतिरिक्त कक्ष, पेयजल, शौचालय, बिजली, फर्नीचर और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने, नियमित कक्षाएं संचालित करने और विषयवार शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई।
परिषद ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने तथा शिक्षकों को अनावश्यक गैर-शैक्षणिक और कार्यालयीन कार्यों में संलग्न रखने की व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है।
समय पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन
ABVP ने ज्ञापन के माध्यम से शिक्षा विभाग को चेताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों से जुड़े इन मुद्दों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगा। परिषद ने कहा कि शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व विद्यार्थियों को पढ़ाना है, इसलिए उनकी सेवाओं का अधिकतम उपयोग शैक्षणिक कार्यों में ही किया जाना चाहिए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ABVP कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों के हित में तत्काल कार्रवाई की मांग की। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन सात सूत्रीय मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है।




