खैरागढ़। शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा देने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ नवीन व्यावसायिक प्रशिक्षक कल्याण संघ ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रशिक्षकों ने मानदेय में वृद्धि, सेवा सुरक्षा, लंबित भुगतान और कार्य व्यवस्था में सुधार सहित कई मांगें रखीं।
वीडियो देखें
https://www.facebook.com/share/v/1C541zK5wU/
संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2014 से व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश के करीब 1,285 विद्यालयों में विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, अपैरल, पावर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी, कंस्ट्रक्शन, रिटेल, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर, टेलीकॉम, आईटी, प्लंबिंग, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, बैंकिंग-फाइनेंस और हेल्थ केयर जैसे रोजगारपरक ट्रेडों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
10 साल की सेवा के बाद भी मानदेय को लेकर नाराजगी
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने कहा कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और सेवा सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। संघ ने हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने तथा प्रत्येक वर्ष नियमित वेतन वृद्धि लागू करने की मांग की है।
कंपनी आधारित व्यवस्था खत्म करने की मांग
संघ ने व्यावसायिक प्रशिक्षकों की तृतीय पक्ष अथवा कंपनी आधारित व्यवस्था समाप्त कर उन्हें विभागीय व्यवस्था में शामिल करने और सेवा सुरक्षा देने की मांग की है। प्रशिक्षकों का कहना है कि इससे उन्हें स्थायित्व मिलेगा और स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
1,029 प्रशिक्षकों के लंबित मानदेय का मुद्दा
ज्ञापन में 1,029 व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मई और जून माह के लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान करने की मांग की गई है। साथ ही PAB 2025-26 के अनुसार स्वीकृत 1,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय वृद्धि की लंबित राशि का एरियर्स सहित भुगतान करने की मांग भी रखी गई।
वहीं हेल्थ केयर ट्रेड के 121 अनुभवी प्रशिक्षकों का मानदेय 23 हजार से घटाकर 20 हजार रुपये किए जाने पर भी संघ ने नाराजगी जताई है। प्रशिक्षकों ने पुनः 23 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
अवकाश और कार्य व्यवस्था में सुधार की मांग
प्रशिक्षकों ने औद्योगिक भ्रमण एवं गेस्ट लेक्चर के लिए निर्धारित राशि में हुई करीब 25 प्रतिशत कटौती की भरपाई, गैर-व्यावसायिक कार्य नहीं कराने तथा समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
इसके अलावा आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश और ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसी सुविधाएं देने, समय पर मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने तथा व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ी समस्याओं की नियमित समीक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
प्रशिक्षकों ने कहा- मांगों के समाधान से विद्यार्थियों को भी होगा लाभ
संघ ने कहा कि व्यावसायिक प्रशिक्षक विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यदि प्रशिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जाता है तो इससे उन्हें राहत मिलने के साथ-साथ स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता भी बेहतर होगी।
प्रशिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निराकरण की पहल करने की मांग की है। अब देखना होगा कि विभाग की ओर से इन मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है।



