खैरागढ़। खैरागढ़ नगर पालिका में इन दिनों विकास की रफ्तार देखकर लगता है कि शहर की गाड़ी में इंजन तो तीन हैं, लेकिन शायद एक्सीलेटर ढूंढने वाला कोई नहीं! नगर के हर वार्ड में गंदगी, जगह-जगह कचरे के ढेर, आवारा पशु, खराब सड़कें और बंद स्ट्रीट लाइटें शहर की व्यवस्था की कहानी खुद बयां कर रही हैं। जनता सवाल कर रही है कि जब प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार है, तो फिर खैरागढ़ की विकास गाड़ी आखिर किस स्टेशन पर खड़ी है?
शहर में प्रवेश करते ही स्वागत के लिए सबसे पहले गड्ढे नजर आते हैं। यानी खैरागढ़ आने वालों के लिए नगर पालिका की ओर से मानो ‘फ्री ऑफ कॉस्ट झटका सेवा’ उपलब्ध है। इसके बाद शहर की गलियों में घूमते हुए आवारा पशु और जगह-जगह फैली गंदगी व्यवस्था की तस्वीर दिखाती है।
उमराव पुल की स्ट्रीट लाइटें करीब पखवाड़े से बंद होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि लाइट बंद है या व्यवस्था की ‘रोशनी’ ही बुझ गई है? शहर तेजी से अतिक्रमण की चपेट में आने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। लोगों का आरोप है कि कार्रवाई छोटे दुकानदारों और गरीबों पर तो होती है, लेकिन बड़े अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन की रफ्तार कुछ धीमी पड़ जाती है।
बस स्टैंड का यात्री प्रतीक्षालय भी बदहाली का शिकार बताया जा रहा है। यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और परिसर में गंदगी की शिकायतें हैं। बाहर से आने वाला यात्री शहर की सुंदरता देखने से पहले शायद नगर की ‘व्यवस्था’ का नमूना देख लेता है।
सबसे चर्चित मामला नगर पालिका कार्यालय का बिजली कनेक्शन कटने का रहा। बिजली बिल भुगतान को लेकर लंबे समय से बकाया राशि और करीब 4 करोड़ रुपये की वसूली की चर्चा ने नगर की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। बिजली कटने के बाद पालिका का कामकाज प्रभावित होने की बात भी सामने आई, जिससे आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
विपक्ष लगातार भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप लगाता रहा है। वहीं जनता का सवाल सीधा है—जिस विश्वास के साथ नगर अध्यक्ष और पार्षदों को चुना गया, क्या उस विश्वास के मुताबिक शहर का विकास हो रहा है?
करीब साढ़े बाइस हजार की आबादी वाले खैरागढ़ में राजनीतिक सक्रियता की कोई कमी नहीं है। यहां नेता भी खूब हैं, भाषण भी खूब हैं और दावे भी खूब हैं... बस जनता अब पूछ रही है—साहब, विकास कब होगा?
आखिर ट्रिपल इंजन की सरकार में भी अगर नगर की सड़कें गड्ढों में, गलियां कचरे में और व्यवस्थाएं सवालों में हैं, तो फिर जनता किस इंजन का इंतजार करे?
खैरागढ़ को विकास की जरूरत है, सिर्फ दावों की नहीं। अब जनता देखना चाहती है कि नगर पालिका की ‘विकास गाड़ी’ कब न्यूट्रल से निकलकर आगे बढ़ती है।




