खैरागढ़। दनिया-अतरिया, हनईबन और उदयपुर गांवों में प्रस्तावित श्री सीमेंट फैक्ट्री और चूना पत्थर खदान परियोजना के खिलाफ किसानों का गुस्सा एक बार फिर भड़क उठा है। जनसुनवाई की आहट के बीच किसान अधिकार संघर्ष समिति महिला प्रकोष्ठ ने प्रशासन और नेताओं को सीधी चेतावनी दी है — परियोजना निरस्त नहीं हुई तो इस बार आंदोलन पहले से कहीं ज्यादा उग्र होगा।
पत्रकार वार्ता से पहले महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए परियोजना पूरी तरह निरस्त करने की मांग रखी। समिति अध्यक्ष लुकेश्वरी जंघेल ने खुलकर कहा कि हाल में फैक्ट्री से जुड़े लोग गांव-गांव पहुंचकर परियोजना के "फायदे" गिनाने में जुटे हैं, लेकिन किसान इसे किसी भी सूरत में स्वीकार करने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि 6 दिसंबर 2025 के प्रदर्शन से भी बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, और इस बार कमान महिलाओं के हाथ में होगी।
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समिति ने खनन, ब्लास्टिंग, क्रशिंग और भारी वाहनों की आवाजाही से होने वाली धूल, शोर, कंपन और जलस्रोतों पर पड़ने वाले असर को लेकर गहरी चिंता जताई। साथ ही जमीन खरीद में दबाव बनाए जाने और बिचौलियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। रेस्ट हाउस में प्रशासन और फैक्ट्री प्रतिनिधियों की कथित संयुक्त प्रेस वार्ता को लेकर भी समिति ने तीखे सवाल खड़े किए और राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने को कहा।
जंघेल की चेतावनी दो टूक थी: "किसानों की इच्छा के विरुद्ध जनसुनवाई थोपने का प्रयास हुआ तो आंदोलन और भी उग्र होगा।"
अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं — जनसुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ती है या किसानों के दबाव में परियोजना पर पुनर्विचार होता है।




