खैरागढ़। सावन माह के पावन अवसर पर अटल आवास, शिक्षक नगर में महिलाओं द्वारा सावन झूला उत्सव का आयोजन उत्साह और उमंग के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की सुंदर मिसाल पेश की। आयोजन का नेतृत्व नीलम राजपूत ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सावन गीतों और पारंपरिक झूले के साथ हुई। इसके बाद महिलाओं के लिए मेहंदी लगाओ प्रतियोगिता, कुर्सी दौड़, खो-खो, कबड्डी सहित विभिन्न मनोरंजक एवं पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और एक-दूसरे को सावन पर्व की शुभकामनाएं दीं।
लोकसंस्कृति को सहेजने का संदेश
इस अवसर पर नीलम राजपूत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति केवल त्योहारों और उत्सवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक एकता और सामूहिक जीवन की पहचान है। ऐसे आयोजनों से हमारी पारंपरिक विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचती है और महिलाओं को सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और जनहित जैसे विषयों में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। सामाजिक एवं राजनीतिक जागरूकता के माध्यम से महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के साथ-साथ समाज और क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
जनहित के मुद्दों पर एकजुटता का आह्वान
आयोजन के दौरान महिलाओं को सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक करते हुए जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर सकारात्मक भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। उपस्थित महिलाओं ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाने तथा जनहित के विषयों के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
बड़ी संख्या में महिलाओं की रही सहभागिता
सावन झूला उत्सव में वंदना टांडेकर, अंबा बेरवशी, सुमन खेलवार, राजलक्ष्मी जंघेल, केशर बंजारे, पूनम, भारती गोंड, सीमा दुबे, सोनिया रजक, मंजू देवांगन, सुमन साहू, द्रोपती वर्मा, सरस्वती, तनु, पूनम यादव, सरस्वती वर्मा एवं सीमा श्रीवासनी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, झूले और विभिन्न खेलों का आनंद लेते हुए सावन पर्व को उल्लासपूर्वक मनाया। आयोजन ने जहां छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की खूबसूरत झलक प्रस्तुत की, वहीं महिला सहभागिता, सामाजिक एकता और जनजागरूकता का संदेश भी दिया।



