दुर्ग। जिले के जनपद पंचायत धमधा अंतर्गत ग्राम पंचायत घोटवानी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्य प्रारंभ होने से पहले ही विवाद की स्थिति बन गई है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन पर मनरेगा कार्यों के संचालन में लापरवाही और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत द्वारा मुनादी कर मनरेगा कार्य शुरू होने की सूचना दी गई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की उम्मीद लेकर कार्यस्थल पहुंचे। लेकिन लगातार दूसरे दिन भी कई मजदूरों को काम नहीं मिल सका। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें घंटों इंतजार कराया गया और बाद में कभी केवाईसी प्रक्रिया, कभी फोटो अपलोडिंग तथा कभी तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर वापस भेज दिया गया।
मजदूरों का कहना है कि रोजगार की आवश्यकता होने के बावजूद उन्हें काम से वंचित किया जा रहा है। इससे उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रोजगार सहायक द्वारा संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा रही है और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन पंचायत स्तर पर हो रही अव्यवस्थाओं के कारण जरूरतमंद मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा सभी पात्र मजदूरों को शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे प्रशासन के समक्ष सामूहिक शिकायत दर्ज कराएंगे और आवश्यक होने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाएंगे।
फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से हस्तक्षेप कर मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मजदूरों को तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।


