खैरागढ़। ग्राम पंचायत आमाघाट-कादा की मुख्य सड़क इन दिनों बदहाली का शिकार है। सड़क जगह-जगह टूटकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। जर्जर सड़क से ग्रामीणों को रोजाना आवागमन करना पड़ रहा है, जिससे कभी भी गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक सड़क की मरम्मत को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से परेशानी और बढ़ जाती है।
जनपद सदस्य ने भी कई बार उठाया मुद्दा
इस मामले को लेकर जनपद सदस्य कुसुम जंघेल द्वारा भी प्रशासन के समक्ष कई बार शिकायत की जा चुकी है। जनपद सभाओं में भी सड़क की समस्या को उठाया गया है। इसके बावजूद अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को बेहद सावधानी से आवागमन करना पड़ता है। सड़क की बदहाली के चलते स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
46.85 लाख की लागत से नवीनीकरण का प्रस्ताव
वहीं संबंधित विभाग की ओर से बताया गया है कि यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत आती है और इसकी लंबाई करीब 1.50 किलोमीटर है। सड़क के नवीनीकरण के लिए लगभग 46.85 लाख रुपये की लागत का प्राक्कलन तैयार कर वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल करने हेतु उच्च कार्यालय को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। विभाग के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद सड़क का नवीनीकरण कार्य कराया जाएगा।
सवाल—स्वीकृति तक ग्रामीणों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
विभाग की प्रक्रिया के बीच बड़ा सवाल यह है कि यदि सड़क की हालत इतनी जर्जर है और हादसे का खतरा बना हुआ है, तो स्वीकृति मिलने तक सड़क की तत्काल मरम्मत या आवश्यक सुधार की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित नवीनीकरण कार्य की स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा तब तक सड़क पर आवश्यक मरम्मत कर आवागमन को सुरक्षित बनाया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क की समस्या पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही समस्या का समाधान करना चाहिए।



