बेमेतरा में जुटे प्रदेशभर के 500 से अधिक साहित्यकार, KCG के कलमकारों को प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिह्न देकर किया गया सम्मानित
खैरागढ़। छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध विरासत को सहेजने और साहित्यकारों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से बेमेतरा में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का दसवां प्रांतीय सम्मेलन आयोजित किया गया। 26 और 27 सितंबर को होटल द किंग्स महल में आयोजित इस दो दिवसीय साहित्यिक महाकुंभ में प्रदेशभर के 500 से अधिक साहित्यकारों, कवियों, लेखकों और गीतकारों ने अपनी रचनाओं से साहित्य का रंग जमाया। सम्मेलन में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) जिले के साहित्यकारों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की और अपनी काव्य प्रस्तुतियों से खूब तालियां बटोरीं।
सम्मेलन का शुभारंभ दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल ने किया। इस अवसर पर स्थानीय विधायक दीपेश साहू और नगर पालिका अध्यक्ष विजय सिन्हा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
KCG के साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से मोहा मन
KCG जिला समन्वयक डॉ. सियाराम साहू के नेतृत्व में जिले के अनेक साहित्यकारों ने सम्मेलन में हिस्सा लिया। इनमें राजकुमार मसखरे, महदीप जंघेल, दूजराम साहू, रूपेश कुमार देवांगन, शिवप्रसाद साहू, भावेश देशमुख, धर्मेंद्र जंघेल, टीकाराम देशमुख, दिलीप पुडेटी, गुनीराम वर्मा 'बादल', मुकेश साहू और इंदिरा चंद्रवंशी सहित अन्य साहित्यकार शामिल रहे।
सभी रचनाकारों ने अपने विशिष्ट अंदाज में काव्य पाठ और गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ी माटी की महक, लोकजीवन और साहित्यिक संवेदनाओं की झलक देखने को मिली। KCG के साहित्यकारों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।
प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिह्न देकर किया सम्मानित
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा एवं सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने KCG जिले से शामिल सभी साहित्यकारों को प्रशस्ति-पत्र और प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस सम्मान से जिले के साहित्यकारों में हर्ष का माहौल रहा।
जिले के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पीसीलाल यादव, डॉ. राजन यादव, डॉ. मांघीलाल यादव, विनय शरण सिंह और श्रीमती पद्मा साहू सहित अन्य साहित्यकारों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए सम्मेलन में शामिल रचनाकारों को शुभकामनाएं दीं।
पुरखा साहित्यकारों का स्मरण, AI युग में साहित्य पर चर्चा
दो दिवसीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के साहित्यिक इतिहास से लेकर आधुनिक तकनीक के दौर में साहित्य की बदलती भूमिका तक विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। साहित्यकारों ने छत्तीसगढ़ के पुरखा रचनाकारों के योगदान को याद करते हुए उनकी साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर डॉ. परदेशीराम वर्मा, मीर अली मीर, अरुण निगम, डॉ. चितरंजन कर, शशि दुबे, विनोद वर्मा, सरला शर्मा और बलदाऊ राम साहू सहित प्रदेश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने सम्मेलन की गरिमा बढ़ाई।
साहित्य और संस्कृति के संगम का गवाह बना सम्मेलन
प्राचीन छत्तीसगढ़ से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के आधुनिक युग तक साहित्य के विविध आयामों पर विचार-विमर्श के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। इस आयोजन ने प्रदेश के साहित्यकारों को एक-दूसरे की रचनाओं से परिचित होने और साहित्यिक विचारों के आदान-प्रदान का अवसर दिया।
KCG जिले के साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता और सम्मान से जिले की साहित्यिक पहचान को नई ऊर्जा मिली। सम्मेलन में मिली सराहना और सम्मान ने स्थानीय रचनाकारों को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य के लिए निरंतर लेखन करने की प्रेरणा दी।


