खैरागढ़। वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को संरक्षित वन्यजीवों के अवैध परिवहन के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से अनुसूची-1 में शामिल एक जीवित इंडियन मॉनिटर लिजर्ड (गोह), एक वाटर हेन तथा एक तीतर बरामद किया गया। मामले में आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद 22 जुलाई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।
वनमण्डलाधिकारी खैरागढ़ के मार्गदर्शन एवं उपवनमण्डलाधिकारी गंडई के निर्देशन में वन परिक्षेत्र गंडई के परिक्षेत्र अधिकारी संजीत मरकाम के नेतृत्व में वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 8 जुलाई 2026 को वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए पल्सर मोटरसाइकिल से वन्यजीवों का अवैध परिवहन कर रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
मॉनिटर लिजर्ड समेत तीन वन्यजीव बरामद
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से एक जीवित इंडियन मॉनिटर लिजर्ड (गोह), जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में संरक्षित प्रजाति है, के अलावा एक जीवित वाटर हेन तथा एक जीवित तीतर बरामद किया गया। वन विभाग ने मौके से अवैध शिकार में प्रयुक्त जाल, फंदा, चाकू एवं पल्सर मोटरसाइकिल भी जब्त की।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ मामला
वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 48-ए, 49 एवं 51(1) के तहत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की। इसके बाद 9 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायालय ने उन्हें 9 जुलाई से 22 जुलाई 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए।
इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में वन परिक्षेत्र अधिकारी संजीत मरकाम के नेतृत्व में वनपाल सदाराम जांघेल, विकास हिरणवार, वनरक्षक अरशद कुरैशी, धर्मेंद्र साहू, हेम सिंह ठाकुर, प्रेम सागर सिदार, अजय रात्रे, अनिल कुमार गेंदले तथा सुरक्षा श्रमिकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वन विभाग की अपील
वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों का शिकार, अवैध परिवहन और व्यापार कानूनन दंडनीय अपराध है। यदि कहीं भी इस प्रकार की गतिविधि की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल निकटतम वन कार्यालय को दें, ताकि वन्यजीवों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

