राजनांदगांव। भीषण गर्मी और हीट वेव के बीच जहां आम जनता राहत ढूंढ रही है, वहीं प्रदेश की राजनीति का पारा भी कम होने का नाम नहीं ले रहा। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रूपेश दुबे ने सरकार के “सुशासन” मॉडल पर तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश में “सु” तो कहीं नजर नहीं आ रहा, बस “कुशासन” ही अपना असर दिखा रहा है।
दुबे ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रशासन और अपराधियों की “जुगलबंदी” इतनी मजबूत हो चुकी है कि महिला अत्याचार से लेकर अवैध गतिविधियों तक, हर क्षेत्र में हालात “काबू में” कम और “खबरों में” ज्यादा दिख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट के एनआईसी से आईडी हैक कर नामांतरण फर्जीवाड़ा हो या अवैध शराब, अफीम खेती, चाकूबाजी—हर मामले में कार्रवाई का इंतजार उतना ही लंबा है जितनी गर्मी की यह लहर।
इतना ही नहीं, उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि
👉 “अवैध धान पकड़ने में फोटो खिंचवाना आसान है, लेकिन उसे छोड़ने की कहानी और भी तेज चलती है।”
👉 “अवैध खनिज हो या फर्जी बीमा—सब कुछ चलता है, बस कार्रवाई ही नहीं चलती।”
दुबे ने यह भी कहा कि हीट स्ट्रोक और हीट वेव को लेकर डॉक्टरों की एडवाइजरी जारी है, लेकिन “सुशासन” के नाम पर सरकारी कर्मचारी ही गर्मी में सबसे ज्यादा “पसीना बहा” रहे हैं।
अंत में उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि
👉 “जब हालात ऐसे हों कि ‘सुशासन’ का ‘सु’ ही गायब हो जाए, तब फटे ढोल को पीटकर उसे ‘संगीत’ बताना थोड़ा ज्यादा ही रचनात्मक प्रयास लगता है।”
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👉 कुल मिलाकर, गर्मी से ज्यादा तपिश अब बयानबाजी में नजर आ रही है, और “सुशासन” शब्द फिलहाल राजनीतिक शब्दकोश में ही ज्यादा सुरक्षित दिख रहा है।


