खैरागढ़,छत्तीसगढ़ प्रदेश में खेती-किसानी की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन खाद की अनुपलब्धता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिला पंचायत राजनांदगांव के पूर्व सभापति और कांग्रेस नेता विप्लव साहू ने खाद के लिए भटक रहे किसानों की बदहाली को लेकर भाजपा सरकार की आलोचना की है.
विप्लव साहू ने कहा कि जून में मानसून की दस्तक होने वाली है और किसान खेतों की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन खैरागढ़-छुईखदान-गंडई की सोसायटियों की स्थिति दयनीय है. उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी सोसायटी में किसानों को एक बोरी खाद तक नसीब नहीं हो रही है और न ही समितियों के पास खाद की आवक को लेकर कोई पुख्ता सूचना है.
नियमों के नाम पर अन्नदाताओं का उत्पीड़न -
कांग्रेस नेता ने निजी विक्रेताओं और खुले बाजार में लागू किए गए कड़े नियमों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि खाद विक्रेताओं द्वारा किसानों से अनिवार्य रूप से बी-1, नक्शा और खसरा की मांग की जा रही है. यह नियम न केवल जटिल है, बल्कि पहले से परेशान किसानों को मानसिक रूप से तंग करने वाला है.
खाद की कतारों में खड़ा अन्नदाता और सत्ता की उदासीनता-
आसमान में मंडराते बादल किसानों के लिए उम्मीद का संदेश लेकर आते हैं. खेतों की मेड़ें संवरने लगती हैं, हल की धार तेज होने लगती है और गांवों में खरीफ की तैयारी का उत्साह दिखाई देने लगता है. लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ का अन्नदाता उम्मीद से ज्यादा चिंता ढोता नजर आ रहा है. वजह है खाद की भारी किल्लत और उस पर शासन के ऐसे कठोर नियम, जिन्होंने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है.
विप्लव साहू ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा
सरकार की यह उदासीनता खरीफ सीजन की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. सरकार अन्नदाताओं की कमजोर हालत को और अधिक जटिल बनाना बंद करें. समय रहते सोसायटियों में खाद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहिए.


