खैरागढ़। सरकारी शराब दुकान में शराब तो सुरक्षित मिल रही है, लेकिन दुकान तक पहुंचने वाले शराब प्रेमी कितने सुरक्षित हैं—यह सवाल अब खैरागढ़ में चर्चा का विषय बन गया है।
खैरागढ़ और छुईखदान की सरकारी शराब दुकानों के आसपास सामने आ रहे मारपीट, चोरी, लूटपाट और चाकूबाजी के मामलों ने आबकारी विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए दो वीडियो ने इस सवाल को और हवा दे दी है। एक वीडियो में युवक के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है, जबकि दूसरे वीडियो में पर्स चोरी के शक में एक युवक की कथित तौर पर पिटाई की जा रही है।
अब सवाल यह है कि शराब दुकान में सिर्फ शराब की बोतलों की सुरक्षा जरूरी है या वहां आने वाले लोगों की सुरक्षा भी आबकारी विभाग की जिम्मेदारी का हिस्सा है?
‘गार्ड’ है... लेकिन दिन में कहां?
जानकारी के मुताबिक खैरागढ़ की सरकारी शराब दुकान में सुरक्षा के लिए एक गार्ड की व्यवस्था है, लेकिन उसकी ड्यूटी रात में लगती है। दिन के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—
दिन में शराब दुकान के आसपास कोई विवाद हो जाए, मारपीट हो जाए या चोरी की घटना हो जाए तो सुरक्षा कौन संभालेगा?
क्या विभाग का जवाब होगा—
“हम तो शराब बेच रहे थे, बाकी आपस में निपट रहे थे!”
दुकान के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा?
स्थानीय लोगों की मानें तो शराब दुकान के आसपास कुछ असामाजिक तत्वों की गतिविधियों को लेकर पहले भी शिकायतें और चर्चाएं होती रही हैं। लगातार विवाद और मारपीट की घटनाओं के बावजूद यदि स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो यह आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
शराब दुकान चलाना केवल शराब बेचने तक सीमित नहीं होना चाहिए। दुकान के आसपास का माहौल सुरक्षित रखना, अवैध गतिविधियों पर नजर रखना और किसी भी विवाद की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देना भी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
चोरी का शक हुआ तो अदालत यहीं लग गई!
सबसे गंभीर सवाल वायरल वीडियो को लेकर है।
यदि किसी युवक पर पर्स चोरी का शक था, तो कानून व्यवस्था के तहत पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए थी। सिर्फ शक के आधार पर भीड़ द्वारा किसी व्यक्ति को पीटना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
लेकिन यहां तो मानो नया सिस्टम शुरू हो गया—
“चोरी का शक है? पहले फैसला करो, जांच बाद में होगी!”
अगर ऐसी घटनाएं शराब दुकानों के आसपास बार-बार हो रही हैं तो प्रशासन को यह देखना होगा कि आखिर वहां ऐसा माहौल क्यों बन रहा है।
आबकारी विभाग की ‘व्यवस्था’ पर बड़ा सवाल
खैरागढ़ में पिछले कुछ महीनों में चाकूबाजी, लूटपाट, मारपीट और विवाद से जुड़ी कई घटनाओं की चर्चा सामने आई है। वहीं शराब दुकानों को लेकर ओवररेटिंग जैसे आरोप भी समय-समय पर उठते रहे हैं।
यदि शिकायतें और घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तो विभाग को यह बताना चाहिए कि दुकानों की नियमित जांच कितनी बार की जा रही है? ओवररेटिंग की जांच के लिए रैंडम चेकिंग कितनी हुई? दुकानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कब हुई?
क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की बिक्री का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जिसके भरोसे सरकारी शराब दुकानें संचालित हो रही हैं।
राजस्व चाहिए, व्यवस्था नहीं?
शराब से सरकार को बड़ा राजस्व मिलता है। सरकार के खजाने में शराब बिक्री का पैसा पहुंचता है, लेकिन उसी शराब दुकान के आसपास यदि आम लोगों को मारपीट, चोरी या चाकूबाजी का सामना करना पड़े तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
राजस्व लेने में विभाग आगे, सुरक्षा देने में पीछे—ऐसा तो नहीं होना चाहिए!
और यदि आबकारी विभाग का कहना है कि शराब दुकान के आसपास होने वाली हर घटना उसकी जिम्मेदारी नहीं है, तो फिर सवाल यह भी है कि दुकान के आसपास सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
जांच हो, जिम्मेदारी तय हो
वायरल वीडियो की सत्यता और घटनाओं के वास्तविक कारणों की जांच संबंधित पुलिस और प्रशासन द्वारा की जानी चाहिए। केवल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या कर्मचारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
लेकिन घटनाओं की लगातार चर्चा और वीडियो सामने आने के बाद आबकारी विभाग को भी सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि खैरागढ़ की सरकारी शराब दुकानों में सुरक्षा, ओवररेटिंग की रोकथाम और दुकान परिसर के आसपास कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी क्या व्यवस्था है।
क्योंकि जनता का सीधा सवाल है—
“शराब की दुकान सरकारी है, राजस्व सरकार का है, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?”
और सबसे बड़ा सवाल—
“शराब की बोतल सुरक्षित है, लेकिन शराब खरीदने वाला सुरक्षित है क्या?”
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