खैरागढ़ जिले में इन दिनों खनिज विभाग मानो “आराम फरमाने” की प्रतियोगिता जीतने में लगा हुआ है। उधर अवैध मुरम खनन और इधर अवैध ईंट भट्ठों की भरमार—सब कुछ खुलेआम चल रहा है, जैसे किसी ने विभाग को पहले ही “नो एंट्री” का बोर्ड थमा दिया हो।
बाजार अतरिया, जालबांधा और उदयपुर क्षेत्र में तो हालात ऐसे हैं कि अवैध ईंट भट्ठे अब उद्योग नहीं, बल्कि “परंपरा” बन चुके हैं। धुआं आसमान में और चिंता ग्रामीणों के दिल में उड़ रही है। आसपास के रहवासी परेशान हैं, खेतों की उर्वरता खत्म हो रही है, फसलें दम तोड़ रही हैं—लेकिन विभाग की नींद में कोई खलल नहीं पड़ता।
शिकायतें लगातार हो रही हैं, पर कार्रवाई का नामोनिशान नहीं। अब सवाल उठता है—क्या खनिज विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है, या फिर “जानकर भी अनजान” बने रहना नई नीति है? सूत्रों की मानें तो कुछ रिश्ते इतने “मजबूत” हैं कि कार्रवाई करने से पहले शायद चाय-नाश्ते का निमंत्रण याद आ जाता है।
अवैध कारोबारियों का हौसला भी देखिए—बिना डर, बिना रोक-टोक सब कुछ जारी है। लगता है जैसे उन्हें किसी अदृश्य सुरक्षा कवच का आशीर्वाद प्राप्त हो। और विभाग? वह शायद अगली नींद की शिफ्ट की तैयारी में व्यस्त है।
कुल मिलाकर, खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने की जिम्मेदारी फिलहाल “कागजों” में ही सक्रिय नजर आ रही है। जमीन पर तो सिर्फ अवैध धंधे ही फल-फूल रहे हैं—और प्रशासन की छवि भी उसी धुएं में उड़ती दिखाई दे रही है।


