खैरागढ़।ग्राम पंचायत बाजार अतरिया में इन दिनों भीषण पेयजल संकट की स्थिति बनी हुई है। केंद्र शासन की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत एकल ग्राम रेट्रोफिटिंग योजना अंतर्गत लगभग186.19 लाख रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस कार्य की जिम्मेदारी मेसर्स तापड़िया कंसल्टेंसी, प्रोपराइटर विष्णु तापड़िया को दी गई है।
जानकारी के अनुसार पानी टंकी का निर्माण कार्य आधे से अधिक पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक टंकी का परीक्षण (टेस्टिंग) नहीं हो पाया है। इसके पीछे मुख्य वजह ठेकेदार द्वारा बिजली विभाग की पेनल्टी राशि जमा नहीं करना बताया जा रहा है।
दरअसल 5 मार्च 2025 को राजनांदगांव विद्युत विभाग की उड़नदस्ता टीम ने धान खरीदी केंद्र के पास निर्माणाधीन पानी टंकी स्थल पर छापेमार कार्रवाई की थी। जांच के दौरान बिजली के खंभे से डायरेक्ट हुकिंग कर अवैध रूप से बिजली चोरी कर निर्माण कार्य करते पाया गया। इस पर विद्युत विभाग ने कार्रवाई करते हुए मेसर्स तापड़िया कंसल्टेंसी के नाम से 1,13,047 रुपए की पेनल्टी लगाई थी। हैरानी की बात यह है कि लगभग एक वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक यह राशि जमा नहीं की गई है।
पेनल्टी की राशि जमा नहीं होने के कारण निर्माण स्थल को विधिवत बिजली कनेक्शन भी नहीं मिल पाया है, जिससे पानी टंकी का टेस्टिंग कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इसके चलते बाजार अतरिया के ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
इस मामले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि यदि किसी घरेलू उपभोक्ता या छोटे दुकानदार का बिजली बिल एक माह भी बकाया रह जाए तो विभाग तत्काल कनेक्शन काट देता है। वहीं इस मामले में बिजली चोरी और एक लाख से अधिक की पेनल्टी के बावजूद अब तक ठेकेदार के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
इस संबंध में क्रांति सुनहरे, सहायक अभियंता (AE) खैरागढ़ ने बताया कि यह मामला लगभग एक वर्ष पुराना है और ठेकेदार को कई बार सूचना दी जा चुकी है। साथ ही थाना और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी कार्रवाई के लिए पत्राचार किया गया है तथा आगे भी आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र व्यवहार किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती और पेनल्टी की राशि वसूली जाती तो पानी टंकी का टेस्टिंग कार्य पूरा हो सकता था और क्षेत्र के लोगों को पेयजल संकट से राहत मिल सकती थी। अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।


