खैरागढ़।मानवता, संवेदनशीलता और सामुदायिक सहयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल खैरागढ़ में देखने को मिली, जहां एक 45 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं बेघर महिला को संयुक्त प्रयासों से नया जीवन मिला। यह सराहनीय कार्य तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़, पुलिस प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से संभव हो पाया।
## 🤝 जानकारी से शुरू हुई मदद की पहल
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के मार्गदर्शन में पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू द्वारा जागरूकता अभियान के दौरान जानकारी मिली कि एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सिविल जिला अस्पताल खैरागढ़ में भर्ती कराया गया है।
इसी दौरान पत्रकार दिनेश साहू ने मानवीय पहल करते हुए महिला के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जिससे आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
## 🧠 पहचान बनी चुनौती, जीवन बन गया संघर्ष
प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने अपना नाम “रुक्मणी” बताया, लेकिन वह अपनी सही पहचान और पता बताने में असमर्थ थी।
स्थानीय सरपंच प्रतिनिधि हरप्रसाद वर्मा और पत्रकार दिनेश साहू ने बताया कि यह महिला पिछले एक वर्ष से गांव में भटक रही थी और लोगों की दया पर जीवन यापन कर रही थी।
महिला कचरे के बीच रहकर गुजारा कर रही थी, जिससे उसकी सुरक्षा और सम्मान दोनों पर खतरा बना हुआ था।
## 🚑 तत्काल इलाज और सुरक्षित व्यवस्था
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीएलवी गोलूदास साहू ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था कर महिला को सिविल अस्पताल खैरागढ़ में भर्ती कराया।
यहां डॉ. विवेक बिसेन और डॉ. पंकज वैष्णव सहित मेडिकल टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला (संभावित नाम बिमला बाई) पिछले 5-6 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ होकर भिक्षाटन कर जीवन यापन कर रही थी और उसका कोई परिजन नहीं है।
## 🏥 बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर रेफर
महिला की स्थिति को देखते हुए उसे आगे के इलाज के लिए छत्तीसगढ़ राज्य मनोरोग चिकित्सालय, सेंद्री (बिलासपुर) रेफर किया गया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि शर्मा के निर्देश पर महिला को वहां भर्ती कराया गया, जहां डॉ. प्रीति और उनकी टीम द्वारा उपचार किया जा रहा है।
## 👥 सामूहिक प्रयास से बनी मिसाल
इस पूरे कार्य में कई लोगों का सराहनीय योगदान रहा, जिनमें:
सरपंच *बिमला वर्मा **
उप सरपंच *यादराम साहू**
सामाजिक कार्यकर्ता *जगदीश वर्मा**
थाना प्रभारी *अनिल शर्मा**
प्रधान आरक्षक भागवत मेश्राम और मुस्तकीम खान, आरक्षक लक्ष्मी सिंह और नीलम पाल,
* आरक्षक एवं पुलिस टीम
का विशेष सहयोग शामिल है।
## 🟡 DNnews निष्कर्ष
यह घटना केवल एक महिला की मदद की कहानी नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि जब प्रशासन, न्यायिक तंत्र और समाज एक साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
👉 खैरागढ़ में यह पहल मानवता, संवेदनशीलता और सामुदायिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आई है।


