Dindayal yadu Chhuikhadan.
छुईखदान। सरकारी दफ्तरों में जनता को सुविधाएं देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन छुईखदान तहसील कार्यालय और रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचने वाले लोगों के लिए एक छोटी-सी मगर बेहद जरूरी सुविधा अब भी सवाल बनी हुई है—शौचालय आखिर जाएं तो जाएं कहां?
प्रतिदिन तहसील कार्यालय में विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए और रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री कराने बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचते हैं। इनमें आसपास के गांवों के साथ-साथ दूरदराज और वनांचल क्षेत्रों से आने वाले लोग भी शामिल हैं। कई लोगों को दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने तक घंटों कार्यालय में रुकना पड़ता है।
ऐसे में यदि किसी को शौचालय की जरूरत पड़ जाए तो सरकारी व्यवस्था मानो कहती है—“काम हमारा, शौचालय आपका!” लोगों को कार्यालय परिसर से बाहर जाकर सुविधा तलाशने की मजबूरी हो जाती है।
महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानी ज्यादा
इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। दूर गांवों से आने वाली महिलाओं को कई बार घंटों कार्यालय में इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में शौचालय की सुविधा नहीं होना उनके लिए महज असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर परेशानी बन जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालय कोई ऐसी जगह नहीं है जहां लोग घूमने आते हैं। यहां लोग अपने जरूरी सरकारी काम और जमीन संबंधी दस्तावेजों के लिए पहुंचते हैं। जब काम पूरा होने में समय लगना तय है, तो शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए?
रजिस्ट्री के लिए आते हैं दूर-दूर से ग्रामीण
रजिस्ट्रार कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री कराने कई किलोमीटर दूर से ग्रामीण पहुंचते हैं। दस्तावेजों की जांच और प्रक्रिया में समय लगने के कारण उन्हें काफी देर तक रुकना पड़ सकता है। लेकिन इस दौरान प्राकृतिक जरूरतों के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं होना लोगों की परेशानी बढ़ा देता है।
विडंबना यह है कि सरकारी दफ्तर जनता की सुविधा के लिए हैं, लेकिन यहां पहुंचकर जनता को सुविधा ढूंढने के लिए फिर बाहर निकलना पड़ रहा है।
अब व्यवस्था की ओर टिकी नजर
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि तहसील एवं रजिस्ट्रार कार्यालय परिसर में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्वच्छ एवं उपयोग योग्य सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की जाए। साथ ही नियमित साफ-सफाई और रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।
अब सवाल यही है कि जब जनता जमीन की रजिस्ट्री कराने सरकारी कार्यालय तक पहुंच सकती है, तो क्या जिम्मेदार व्यवस्था एक शौचालय तक नहीं पहुंचा सकती?
देखना होगा कि आम जनता से सीधे जुड़े इन महत्वपूर्ण कार्यालयों में मूलभूत सुविधा की इस समस्या पर जिम्मेदार अधिकारी कब गंभीरता दिखाते हैं।
अगर इसे और ज्यादा तीखा DNnews व्यंग्यात्मक अंदाज देना हो, तो मुख्य लाइन “तहसील में रजिस्ट्री हो रही, शौचालय की व्यवस्था ‘पेंडिंग’!” रखी जा सकती है।


