खैरागढ़। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित निर्मल त्रिवेणी महाअभियान के तहत जल शिंचन कार्यक्रम में बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। नौनिहालों ने पौधों को जल अर्पित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी का परिचय कराया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पौधों की सिंचाई करते हुए यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण संस्कार है। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि समाज के विकास के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। केवल भौतिक उन्नति नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित विकास ही सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है।
इस अवसर पर बच्चों को वृक्षों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। नदियाँ हमारी संस्कृति और सभ्यता की पहचान हैं तथा पृथ्वी समस्त जीव-जंतुओं का साझा घर है।
कार्यक्रम में "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना को आत्मसात करते हुए सभी को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
निर्मल त्रिवेणी महाअभियान के इस आयोजन में बच्चों द्वारा पौधों को जल अर्पित कर पर्यावरण के प्रति जागरूकता का जो संदेश दिया गया, वह समाज के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।


