### अकील मेमन की कलम से ✍️
छुरिया/गैंदाटोला।गैंदाटोला शराब दुकान विरोध आंदोलन अब सिर्फ शराब दुकान हटाने की मांग तक सीमित नहीं रहा। यह आंदोलन अब खुज्जी विधानसभा की राजनीति में नेतृत्व, जनसंघर्ष और विपक्ष की भूमिका पर बड़ा सवाल बन चुका है।
इस पूरे आंदोलन में जिस तरह पूर्व विधायक Chhanni Sahu लगातार गांव-गांव पहुंचकर महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों के साथ खड़ी दिखाई दीं, उसने उन्हें क्षेत्र में एक जुझारू, संघर्षशील और जमीनी महिला नेत्री के रूप में नई पहचान दी है।
ग्रामीणों के बीच एक ही चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है —
“नेता वही, जो चुनाव में नहीं… संघर्ष के समय जनता के साथ खड़ा दिखाई दे।”
## जब जनता सड़क पर थी, तब कौन साथ खड़ा था?
गैंदाटोला आंदोलन ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण जनता आज भी भाषण से ज्यादा संघर्ष को महत्व देती है।
गांव की महिलाएं, युवा और बुजुर्ग लगातार आंदोलन में डटे रहे, लेकिन इस दौरान कई बड़े राजनीतिक चेहरे और संगठनात्मक पदाधिकारी दूर-दूर तक नजर नहीं आए।
एक ओर भाजपा सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था ग्रामीणों की भावनाओं को समझने में नाकाम दिखाई दी, तो दूसरी ओर विपक्ष की भूमिका निभाने वाली कांग्रेस के कई जिम्मेदार चेहरे भी मौन साधे रहे।
यही वजह रही कि क्षेत्र में “फूलछाप कांग्रेस” जैसी चर्चाएं फिर से तेज हो गईं।
## मुद्दे बहुत थे… लेकिन आवाज कितनों ने उठाई?
चना बीमा घोटाला, चिरचारी में मासूम बच्चे की मौत, सड़क निर्माण में अनियमितता, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अब गैंदाटोला शराब दुकान विवाद —
इन तमाम मुद्दों पर जनता लगातार जवाब मांगती रही।
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब संगठनात्मक स्तर पर चुप्पी दिखाई दी, तब छन्नी साहू सड़क पर संघर्ष करती नजर आईं।
चाहे धान खरीदी की समस्या हो, बिजली-पानी संकट, सूखा राहत, स्कूल-कॉलेज की बदहाली या प्रशासनिक भ्रष्टाचार —
हर मुद्दे पर उन्होंने सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तर तक आवाज बुलंद की।
## “सिर्फ चुनाव नहीं, जनआंदोलन की राजनीति”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में बहुत कम ऐसे नेता बचे हैं, जो विपक्ष में रहते हुए भी बिना राजनीतिक भय के जनता के मुद्दों पर खुलकर संघर्ष करते हों।
गैंदाटोला आंदोलन में उनकी सक्रियता ने यह संदेश दिया कि उनकी राजनीति केवल चुनाव तक सीमित नहीं, बल्कि जनआंदोलन केंद्रित है।
महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने यह भी साफ कर दिया कि अब ग्रामीण जनता केवल वादे नहीं, बल्कि संघर्षशील नेतृत्व चाहती है।
## “ग्रामीण अंचल की कांग्रेस की शेरनी”?
आज गैंदाटोला से लेकर पूरे खुज्जी विधानसभा क्षेत्र में एक नई राजनीतिक चर्चा तेजी से चल रही है।
लोग कह रहे हैं कि अगर जनहित, संघर्ष और जनता के प्रति प्रतिबद्धता ही राजनीति का असली पैमाना है, तो छन्नी साहू को “राजनांदगांव जिले के ग्रामीण अंचल की कांग्रेस की शेरनी” कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी।
हालांकि राजनीति में अंतिम फैसला जनता ही करती है, लेकिन इतना तय है कि गैंदाटोला आंदोलन ने खुज्जी की राजनीति में एक नया संदेश जरूर दे दिया है —
जनता अब केवल भाषण नहीं, संघर्ष देखने लगी है।
DNnews — “खबर वही, जो लगे सही”

