खैरागढ़। राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई जारी रखने में परेशानी का सामना कर रही छात्रा नम्रता परते को राहत मिली है। छात्रा की समस्या पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने पहल करते हुए विलंब शुल्क में छूट प्रदान की और प्रवेश की निर्धारित तिथि समाप्त होने के बाद भी विशेष अनुमति देकर बीपीए तृतीय वर्ष गायन में उसका दाखिला सुनिश्चित कराया।
आर्थिक स्थिति बनी प्रवेश में बाधा
मध्य प्रदेश के मंडला जिले की रहने वाली नम्रता परते, पिता कुंवर सिंह परते, विश्वविद्यालय में बीपीए गायन की छात्रा हैं। उन्होंने प्रथम और द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी कर परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसके बाद वह तृतीय वर्ष में प्रवेश लेना चाहती थीं, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते निर्धारित समय पर प्रवेश शुल्क जमा नहीं कर पाईं। वहीं प्रवेश की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद उनके सामने पढ़ाई छूटने की आशंका भी खड़ी हो गई।
छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष अपनी आर्थिक परिस्थिति रखते हुए अनुरोध किया कि वह निर्धारित प्रवेश शुल्क जमा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण विलंब शुल्क देना उनके लिए संभव नहीं है।
कुलपति की पहल से खुला प्रवेश का रास्ता
छात्रा की समस्या की जानकारी मिलने पर कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने विशेष अनुमति प्रदान करते हुए विलंब शुल्क में छूट देने और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए। इसके बाद निर्धारित तिथि समाप्त होने के बावजूद नम्रता परते का बीपीए तृतीय वर्ष गायन में प्रवेश सुनिश्चित हो सका। इस निर्णय से छात्रा को अपनी संगीत शिक्षा आगे जारी रखने का अवसर मिला है।
गैर शिक्षक कर्मचारी संघ से भी मांगी थी सहायता
अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए नम्रता परते ने विश्वविद्यालय के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ से भी सहयोग की अपील की थी। इस संबंध में उन्होंने ज्ञापन सौंपकर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
हालांकि छात्रा को प्रवेश के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना होगा, लेकिन विलंब शुल्क में छूट और विशेष अनुमति से दाखिला मिलने के बाद उनकी आगे की पढ़ाई का रास्ता साफ हो गया है।
आर्थिक कठिनाई के बीच शिक्षा जारी रखने का अवसर
विश्वविद्यालय प्रशासन की इस पहल से एक बार फिर यह बात सामने आई है कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के साथ उनकी व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों को समझना भी आवश्यक है। नम्रता ने प्रथम और द्वितीय वर्ष उत्तीर्ण कर अपनी पढ़ाई के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। ऐसे में उन्हें तृतीय वर्ष में प्रवेश मिलने से संगीत शिक्षा जारी रखने का अवसर मिला है। कुलपति के इस निर्णय को आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे विद्यार्थियों के लिए राहत भरी पहल के रूप में देखा जा रहा है।



