Dinesh Sahu Khairagarh 9098981250
खैरागढ़। खैरागढ़ नगर पालिका चुनाव का माहौल बनने लगा है। राजनीतिक दल नगर अध्यक्ष से लेकर पार्षदों के टिकट पर मंथन कर रहे हैं। ऐसे में शहर के सामने सबसे बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि अगला नगर अध्यक्ष कौन होगा, बल्कि सवाल यह भी है कि अगला नेतृत्व खैरागढ़ को किस दिशा में ले जाएगा?
खैरागढ़ की पहचान केवल एक नगर के रूप में नहीं, बल्कि कला-संस्कृति और संगीत की अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले शहर के रूप में है। यहां देश-विदेश से लोग आते हैं। ऐसे में शहर की सड़कें, नालियां, सफाई, रोशनी और सार्वजनिक सुविधाएं ही शहर की पहली तस्वीर बनती हैं।
लेकिन शहर की मौजूदा तस्वीर पर नजर डालें तो कई सवाल अपने आप खड़े हो जाते हैं।
विकास कागजों पर या जमीन पर?
बीते वर्षों में सरकारें बदलती रहीं, राजनीतिक समीकरण बदलते रहे, लेकिन नगर विकास से जुड़े कई पुराने सवाल अब भी अपनी जगह खड़े नजर आते हैं। कभी सड़क किनारे जलभराव की समस्या सामने आती है तो कभी सफाई और आवारा मवेशियों को लेकर शिकायतें सुनाई देती हैं।
शहर की मुख्य सड़क पर बारिश के दौरान पानी जमा होना भी कोई नई बात नहीं है। कलेक्ट्रेट से लेकर अमलीपारा के उमराव पुल तक कई जगह नाली व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। जहां नालियां बनी हैं, वहां भी कुछ स्थानों पर उनके क्षतिग्रस्त होने अथवा ऊपर से ढक दिए जाने के कारण पानी की निकासी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती हैं।
अब सवाल सीधा है—जब बारिश का पानी सड़क से होकर बहेगा, तो सड़क कितने दिन टिकेगी?
नाली छोटी समस्या नहीं, विकास का आईना
नाली किसी शहर की सबसे आकर्षक चीज नहीं होती, लेकिन शहर के विकास की असली परीक्षा अक्सर इसी से होती है। अच्छी नाली व्यवस्था का मतलब केवल पानी की निकासी नहीं, बल्कि सड़क की उम्र, यातायात और स्वच्छता से भी जुड़ा है।
खैरागढ़ में यदि मुख्य मार्ग पर ही जलभराव की स्थिति बनती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की दीर्घकालीन योजना क्या है?
ऐतिहासिक शहर, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के सवाल बरकरार
खैरागढ़ के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए शहर में पर्यटकों और आगंतुकों के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं होना जरूरी है। लेकिन बस स्टैंड की यात्री सुविधाओं, प्रतीक्षालय, शौचालय, गलियों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
शहर की खूबसूरती केवल किसी एक बड़े प्रोजेक्ट से नहीं बनती। साफ सड़क, व्यवस्थित नाली, रोशन गलियां, स्वच्छ बाजार और बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं—यही मिलकर शहर की पहचान बनाती हैं।
नदियां चारों तरफ, फिर भी संरक्षण का सवाल
खैरागढ़ की भौगोलिक पहचान भी खास है। शहर के आसपास बहने वाली नदियां और जलस्रोत इसकी प्राकृतिक संपदा हैं। ऐसे में इनके संरक्षण, साफ-सफाई और भविष्य की योजना को लेकर गंभीर पहल की जरूरत है।
यदि प्राकृतिक संसाधन हमारे पास हैं, लेकिन उनका संरक्षण और उपयोग व्यवस्थित तरीके से नहीं हो पा रहा, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
आवारा मवेशी—सड़क पर किसकी जिम्मेदारी?
शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा भी लगातार चर्चा का विषय रहा है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
यहां सवाल नगर पालिका और प्रशासन दोनों से जुड़ता है—आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
अध्यक्ष बदले, अधिकारी बदले... क्या बदलेगा शहर?
नगर पालिका के पिछले कार्यकाल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। एक कार्यकाल में नेतृत्व परिवर्तन से लेकर अधिकारियों के बार-बार बदलने तक की स्थिति ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली और विकास की निरंतरता पर सवाल खड़े किए हैं।
अधिकारियों पर कार्रवाई या निलंबन जैसी घटनाएं यदि होती हैं तो उनके वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित जांच एवं आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होता है। लेकिन आम नागरिक के लिए सवाल इतना भर है कि बार-बार नेतृत्व और अधिकारियों के बदलने के बीच शहर की विकास योजनाओं की निरंतरता आखिर कैसे बनी रहेगी?
क्योंकि अधिकारी बदलने से फाइलें तो नई टेबल पर पहुंच सकती हैं, लेकिन शहर की समस्याएं वहीं रहती हैं।
करोड़ों के बजट के बाद भी सवाल क्यों?
नगर विकास के लिए हर साल सरकारी योजनाओं और विभिन्न मदों से बजट आता है। सवाल बजट आने का नहीं, बल्कि उसके जमीन पर दिखने वाले परिणाम का है।
यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी नागरिकों को सड़क, नाली, सफाई, प्रकाश और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए शिकायत करनी पड़े, तो निश्चित तौर पर व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
व्यंग्य में कहें तो—बजट की गाड़ी अगर एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही है, तो विकास की गाड़ी शहर की गलियों में अभी भी पहला गियर ढूंढ रही है।
इस बार महिला अध्यक्ष, क्या ‘रिमोट’ किसी और के हाथ में होगा?
आगामी नगर पालिका चुनाव में महिला अध्यक्ष का चुनाव होना है। ऐसे में यह चुनाव केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि शहर में महिला नेतृत्व की वास्तविक भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण होगा।
महिला नेतृत्व को केवल पद तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने, योजनाएं बनाने और शहर की प्राथमिकताएं तय करने का अवसर मिलना चाहिए।
चुनावी चर्चा में अक्सर यह सवाल भी उठता है कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्वयं निर्णय लेंगी या पर्दे के पीछे कोई और व्यवस्था को संचालित करेगा? यह सवाल किसी एक दल या व्यक्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर राजनीतिक दल के महिला नेतृत्व की वास्तविक भागीदारी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
असली मुद्दा—चेहरा नहीं, नेतृत्व की सोच
खैरागढ़ को ऐसे नगर नेतृत्व की जरूरत है जो केवल योजनाओं की सूची न बनाए, बल्कि शहर की जरूरतों को समझे। जो यह तय करे कि अगले पांच साल में शहर की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं क्या होंगी।
क्या पहले नालियां सुधरेंगी?
क्या जलभराव खत्म होगा?
क्या शहर स्वच्छ होगा?
क्या आवारा मवेशियों का स्थायी समाधान निकलेगा?
क्या बस स्टैंड की सुविधाएं बेहतर होंगी?
क्या गलियों में पर्याप्त रोशनी होगी?
क्या ऐतिहासिक खेल मैदान और जलस्रोतों का संरक्षण होगा?
इन सवालों के जवाब चुनावी घोषणा पत्र से ज्यादा जमीन पर होने वाले काम से मिलेंगे।
फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दल नगर अध्यक्ष और पार्षद पदों के प्रत्याशियों को लेकर मंथन में जुटे हैं। टिकट किसे मिलता है, यह जल्द साफ होगा। लेकिन जनता के सामने असली परीक्षा तब होगी, जब वह प्रत्याशी चुनेगी।
क्योंकि इस बार सवाल सिर्फ ‘नगर अध्यक्ष कौन?’ का नहीं है।
सवाल यह है कि खैरागढ़ की विकास गाड़ी का स्टेयरिंग किसके हाथ में होगा—और क्या इस बार गाड़ी सचमुच टॉप गियर में चलेगी?
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