खैरागढ़।पारख सिद्धांत कबीर विचार मंच एवं आयोजन समिति के तत्वावधान में खैरागढ़ के समीप पिपरिया में आयोजित दो दिवसीय दिव्य व सुखद सत्संग कार्यक्रम आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव के साथ भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संत असंग देव साहेब ने अपने ओजस्वी सत्संग प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और जीवन का गहन संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंतिम दिवस दूर-दराज़ से हजारों श्रद्धालु सत्संग का लाभ उठाने पहुंचे। सत्संग पंडाल में भक्ति, प्रेम और समर्पण का ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला कि कई सत्संगी दान पेटी लेकर आगे आए और गजब की धनवर्षा की। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए उत्तम व्यवस्था की गई थी, वहीं भक्तों हेतु भोजन भंडारे की भी सुंदर व्यवस्था रही।
सत्संग के दौरान संत असंग देव साहेब ने पारिवारिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि
> “जब दो आत्माओं की धारा एक सुर में बहती है, तब परिवार में कभी गृहक्लेश नहीं होता। पति-पत्नी को एक ही भक्ति धारा में चलना चाहिए, तभी जीवन में खींचतान समाप्त होती है।”
उन्होंने कहा कि जब एक ही परिवार में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग हो जाते हैं, तो वहां शांति भंग होना स्वाभाविक है। संत असंग देव ने आत्मचिंतन पर जोर देते हुए कहा—
> “दूसरों को समझाना आसान है, लेकिन स्वयं को समझना सबसे कठिन। मन को एक करने के लिए पहले मन को समझाना पड़ता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि लोग अक्सर मन की बात छिपाकर रखते हैं, जबकि सत्य और खुलापन ही आत्मिक शुद्धता का मार्ग है। संत असंग देव साहेब ने आगे कहा—
> “जिनसे डर बना रहता है, उनसे गलतियां कम होती हैं। जहां डर समाप्त हो जाता है, वहां वाणी में घमंड आ जाता है। डर कभी-कभी प्रेम की रक्षा भी करता है।”
संत असंग देव साहेब ने पिपरिया आश्रम के लिए ₹51,000 की नगद सहयोग राशि प्रदान कर अपने सेवा भाव का परिचय दिया।
आयोजन समिति की ओर से घम्मन साहू ने बताया कि यह सत्संग कार्यक्रम सत्संग प्रेमियों के सामूहिक सहयोग से सफल हुआ है, जिसमें आसपास के लोगों का आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं श्रोतागण उपस्थित रहे।


