छुईखदान । जल संसाधन संभाग छुईखदान में कार्यरत कोर्ट लेबर इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें करीब चार महीने से पूरी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
मजदूरों के अनुसार, वे अपनी लंबित मजदूरी के भुगतान की मांग को लेकर लगातार विभागीय कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। हर बार राशि उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है। मजदूरों का कहना है कि मेहनत करने के बाद भी अपनी ही मजदूरी के लिए उन्हें महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
चार महीने में महज 4 हजार रुपये का भुगतान
मजदूरों के मुताबिक जल संसाधन विभाग के माइनर में कार्यरत कोर्ट लेबर को चार महीने की अवधि में महज 4 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं, केनाल में कार्यरत मजदूरों को चार महीने में करीब 10 हजार रुपये ही मिले हैं। कुछ मजदूरों का दावा है कि उन्हें अब तक एक रुपये का भी भुगतान नहीं मिला है।
मजदूरों का कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना बेहद मुश्किल है। मजदूरी नहीं मिलने से घर का राशन, बिजली बिल और रोजमर्रा के अन्य खर्च प्रभावित हो रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई के लिए लेना पड़ रहा ब्याज पर कर्ज
वेतन नहीं मिलने का असर अब मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ने लगा है। मजदूरों ने बताया कि स्कूल फीस, यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब और अन्य शैक्षणिक खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ रहे हैं। इसके अलावा राशन, बिजली बिल और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
मजदूरों ने विभाग से लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है, ताकि आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवारों को राहत मिल सके और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।


