छुईखदान। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की शहीद नगरी छुईखदान में विजयादशमी का पर्व परंपरा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया गया। यहां का ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव देखने दूर-दराज के गांवों से हजारों लोग पहुंचे। दशहरा उत्सव समिति के आयोजन में राजा गिरिराज किशोर दास ने मिट्टी के रावण का वध कर क्षेत्रवासियों को विजयादशमी की बधाई दी।
वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार मंगलवार शाम राजमहल से राजा की भव्य शाही सवारी निकली। सजी हुई बग्गी में सवार राजा की एक झलक पाने के लिए नगर की सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। शाही सवारी के साथ निकले विजय जुलूस में नगरवासियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
रावण वध के बाद आतिशबाजी और लोकसंध्या
रैनी भांठा में रावण वध के बाद विजय जुलूस निकाला गया, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान पहुंचा। यहां दशहरा उत्सव समिति और नगर पंचायत की ओर से रावण दहन के बाद आतिशबाजी की गई। आयोजन में लगभग 20 हजार दर्शकों की उपस्थिति रही। इसके बाद रायपुर से आए कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी लोकसंध्या की प्रस्तुति दी, जिसका दर्शकों ने आनंद लिया।
राजमहल में हुआ पारंपरिक स्वागत
राजमहल पहुंचने पर राजमाता और रानी नम्रता देवी ने तिलक लगाकर राजा का स्वागत किया। लोगों ने पान-मिठाई भेंटकर आशीर्वाद लिया। छुईखदान के दशहरे की विशेष पहचान पान खिलाने की परंपरा भी आज कायम है, जिसमें परिवार की महिलाएं तिलक लगाकर पान का बीड़ा खिलाती हैं।
आयोजन में युवराज राजवर्धन किशोर, युवराज भव्यराज किशोर सहित राजपरिवार के सदस्य, दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी और नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। छुईखदान का यह दशहरा धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना हुआ है।



