खैरागढ़। गंडई नगर से लगे सेतवा, मुंडाटोला, रेंदा और खामही क्षेत्र के जंगलों में लोहा-पत्थर जैसे खनिज पाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद पूरे इलाके में चिंता का माहौल बन गया है। सूत्रों के अनुसार संबंधित वन क्षेत्र में खनिज की मात्रा और गुणवत्ता को लेकर प्रारंभिक जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनिज किस प्रतिशत में उपलब्ध है। इसी बीच पूरे जंगल क्षेत्र को खदान में तब्दील किए जाने की संभावित योजना की चर्चाओं से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जंगल क्षेत्र में बिना किसी पूर्व सूचना और जनसुनवाई के गतिविधियां शुरू की जा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह जंगल उनके जीवन, आजीविका और पर्यावरण का आधार है, लेकिन लगातार जंगलों का सफाया किया जा रहा है। यदि खनन कार्य शुरू होता है तो इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचेगा, बल्कि वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो जाएगा।
इसी मुद्दे को लेकर जोहार पार्टी के कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण जंगल क्षेत्र में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खनन से पूर्व न तो ग्राम सभा से अनुमति ली गई और न ही ग्रामीणों को किसी प्रकार की आधिकारिक जानकारी दी गई। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होती और ग्रामीणों की सहमति नहीं ली जाती, तब तक किसी भी प्रकार का खनन कार्य तत्काल रोका जाए।
जोहार पार्टी के प्रतिनिधियों ने कहा कि जंगल केवल खनिज का स्रोत नहीं, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण समाज की संस्कृति, परंपरा और आजीविका का मूल आधार है। खनन परियोजना लागू होने की स्थिति में इसका सीधा असर पर्यावरण, जल स्रोतों और कृषि व्यवस्था पर पड़ेगा।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर खनिज की जांच जारी है, वहीं ग्रामीण और जन संगठन जंगलों की सुरक्षा और अपने अधिकारों को लेकर लगातार विरोध जता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।


