रायपुर। छत्तीसगढ़ में देशी और अंग्रेजी शराब दुकानें अब शराब बिक्री केंद्र नहीं, बल्कि लूट, मारपीट और गुंडागर्दी के खुले अड्डे बनती जा रही हैं। रोज़ाना शराब खरीदने पहुंचने वाले ग्राहक पाकिटमारी, मोबाइल चोरी और जानलेवा हमलों का शिकार हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकार को इन्हीं दुकानों से रोज़ाना करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है, लेकिन जब बात ग्राहकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की आती है तो सरकार पूरी तरह मूकदर्शक बनी हुई है।
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बीते दिनों खैरागढ़ की देशी शराब दुकान में सामने आया मामला इस व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। यहां एक युवक मोबाइल चोरी करते रंगे हाथों पकड़ा गया, तो बचने के लिए उसने सामने खड़े व्यक्ति के सिर पर शराब की शीशी से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके सिर में तीन टांके लगाए गए। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि प्रदेश की अधिकांश शराब दुकानों के आसपास गुंडा बदमाशों का स्थायी डेरा बन चुका है।


