रायपुर। स्थानीय विमतारा भवन, शांति नगर में आयोजित गोष्ठी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने विमर्श किया. मुख्य अतिथि छग राज्य महिला आयोग अध्यक्ष डॉ. ममता साहू थीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता अशोक कुमार साहू ने की.
प्रमुख वक्ता सामाजिक चिंतक विप्लव साहू ने कहा कि दुनिया में लाखों प्रजातियां हैं, लेकिन मनुष्य ने अपनी बुद्धि, विचार और सृजनशीलता से सभ्यता का निर्माण किया है. इसलिए जिम्मेदारी केवल व्यक्तिगत विकास नहीं हो सकती. आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है. समाज की वास्तविक प्रगति संख्या या संगठन की मजबूती से नहीं होती, बल्कि शिक्षा, ज्ञान, कौशल, सृजनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी से होती है.
आज का आधुनिक समाज समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और संवैधानिक अधिकारों के आधार पर आगे बढ़ रहा है. इसलिए सामाजिक व्यवस्था को सदियों पुराने किसी भी ग्रंथ या व्यवस्था की सीमाओं में बांधकर नहीं देखा जा सकता. मनुस्मृति अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों और मान्यताओं का एक ऐतिहासिक दस्तावेज हो सकती है, लेकिन आधुनिक लोकतांत्रिक भारत की सामाजिक और कानूनी व्यवस्था का आधार भारतीय संविधान है.
आज पहचान जन्म से नहीं, बल्कि योग्यता, शिक्षा, मेहनत से समाज आगे बढ़ रहा है. सवाल यह नहीं है कि हम अतीत को पूरी तरह नकारें या स्वीकार करें, बल्कि यह है कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य के लिए व्यवस्था बनाएं जिसमें जन्म, जाति या सामाजिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो.
विप्लव साहू ने अल्बर्ट आइंस्टीन के विचार का संदर्भ देते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में उत्पादकता और सृजनशीलता का महत्वपूर्ण स्थान है. व्यक्ति यदि अपनी क्षमता का रचनात्मक उपयोग नहीं करता तो उसकी संभावनाएं सीमित हो जाती हैं.
गोष्ठी में मुख्य प्रवक्ता प्रो. घनाराम साहू सहित अन्य वक्ताओं ने भी समाज की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विचार रखे. कार्यक्रम का संचालन योगिता साहू और आभार घनश्याम प्रसाद साहू ने किया.


