खैरागढ़। खैरागढ़ शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए जिस बाईपास सड़क को एक साल में बनकर तैयार होना था, वह अब 15 साल पूरे कर चुकी है, लेकिन सड़क आज भी “निर्माणाधीन स्मारक” बनी हुई है। शायद यह बाईपास नहीं, बल्कि धैर्य परीक्षा योजना थी, जिसमें जनता लगातार पास होती जा रही है और सिस्टम बार-बार फेल।
इस सड़क के निर्माण में अब तक कई ठेकेदार आए और गए, कुछ टर्मिनेट हुए, कुछ नए टेंडर लेकर आए, लेकिन सड़क वहीं की वहीं खड़ी है। लगता है ठेकेदार बदले, सरकारें बदलीं, अफसर बदले, पर बाईपास का भाग्य नहीं बदला। भाजपा शासन में शुरू हुई सड़क कांग्रेस शासन में भी अधूरी रही और अब फिर भाजपा की सरकार आ गई, लेकिन बाईपास अब भी अधूरा इतिहास लिख रही है।


