खैरागढ़। कहते हैं किसान अन्नदाता होता है, लेकिन खैरागढ़ ब्लॉक के डोकराभाठा सेवा सहकारी समिति में तो अन्नदाता ही “डेटा” बनता नजर आ रहा है—वो भी ऐसे आंकड़ों में, जिनका हिसाब खुद किसानों को समझ नहीं आ रहा।
मामला केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) लोन में कथित फर्जीवाड़े का है, जहां अब तक दो दर्जनभर से ज्यादा किसान सामने आ चुके हैं। किसानों का आरोप है कि उनके नाम पर लोन और खाद का ऐसा हिसाब बनाया गया है, जिसे देखकर लगता है जैसे खेत में नहीं, सीधे कागजों में फसल उगाई जा रही हो।
कुछ किसानों ने बताया कि उन्होंने दो बोरी खाद ली, लेकिन रिकॉर्ड में दस बोरी चढ़ गई। वहीं, 25 हजार रुपये का लोन लेने वाले किसान के खाते में हिसाब कुछ और ही कहानी सुना रहा है। अब किसान सोच में हैं कि ये खेती है या “मैनेजमेंट का कमाल”।
बीते दिनों परेशान किसानों ने खैरागढ़ एसडीएम और कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत की। जांच टीम भी पहुंची, लेकिन यहां कहानी में नया ट्विस्ट आ गया—जांच के दौरान ही कुछ कर्मचारियों पर किसानों से बदतमीजी करने के आरोप लग गए। यानी समस्या अलग, व्यवहार अलग!
जैसे ही यह खबर जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष देवराज किशोर दास तक पहुंची, वे मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि “अन्नदाताओं के साथ दुर्व्यवहार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
देवराज ने यह भी संकेत दिया कि अगर एक सोसायटी में यह हाल है, तो बाकी जगहों पर भी “कुछ खास” चल रहा हो सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि उनके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है, तो खुलकर सामने आएं।
किसानों ने एक और गंभीर आरोप लगाया कि सोसायटी के जिम्मेदार अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते, जिससे उन्हें बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। खेती के अहम समय में यह लापरवाही किसानों के लिए और परेशानी बढ़ा रही है।
डोकराभाठा सोसायटी पहले भी विवादों में रह चुकी है। इस बार प्रभार बदलने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन अब सवाल उठ रहा है—क्या बदला सिर्फ नाम, या खेल वही पुराना?
अब सबकी नजर जांच पर टिकी है—क्या सच सामने आएगा या यह मामला भी फाइलों में ही “सेटल” हो जाएगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


