खैरागढ़/छुईखदान। प्रदेश सरकार जहां सुशासन तिहार के माध्यम से आम जनता की शिकायतों के त्वरित निराकरण का दावा कर रही है, वहीं खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम जंगलपुर का मामला इन दावों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। यहां शासकीय माध्यमिक शाला के प्रधानपाठक एवं संकुल समन्वयक संजय सिंह राजपूत के खिलाफ गंभीर शिकायतों की जांच पूरी होने के बावजूद अब तक विभागीय कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों और पालकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
जांच हुई, रिपोर्ट भी सौंपी... लेकिन कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों के अनुसार, सुशासन तिहार के दौरान प्रधानपाठक की लगातार अनुपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने, शिक्षकों पर दबाव बनाने, उपस्थिति पंजी में कथित गड़बड़ी और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की अनुमति के बिना विद्यालय की राशि खर्च किए जाने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
इन शिकायतों की जांच अधिकारी पवन ददरिया ने जांच कर अपनी रिपोर्ट विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को सौंप दी। लेकिन जांच प्रतिवेदन मिलने के बाद भी आज तक संबंधित अधिकारी द्वारा कोई प्रभावी विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीण बोले – आखिर किसका संरक्षण?
ग्रामीणों का आरोप है कि जब जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट भी विभाग के पास मौजूद है, तब कार्रवाई में हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। उनका कहना है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो फिर शिकायत दर्ज कराने और जांच कराने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
कलेक्टर से लेकर डीईओ तक लगाई गुहार
ग्राम पंचायत जंगलपुर के ग्रामीणों और पालकों ने इस मामले को लेकर कलेक्टर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को ज्ञापन सौंपा है। इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) से व्यक्तिगत मुलाकात कर भी तत्काल कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
प्रधानपाठक एवं संकुल समन्वयक संजय सिंह राजपूत का तत्काल स्थानांतरण किया जाए।
स्थानांतरण होने तक उन्हें वर्तमान संकुल क्षेत्र से हटाकर किसी अन्य विद्यालय में अटैच किया जाए।
विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल नए शिक्षक की पदस्थापना की जाए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष विभागीय कार्रवाई की जाए।
सुशासन तिहार पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच पूरी होने और रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो सुशासन तिहार केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा। इससे आम जनता का प्रशासन और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी।
इस सम्बन्ध में मामले की जानकारी के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी को फोन लगाया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया

