राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं प्रदेश कांग्रेस विधि विभाग के महामंत्री रूपेश दुबे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दुबे ने आयोग द्वारा 5 से 31 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाने के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि यह अवधि पितृपक्ष और नवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों के दौरान पड़ रही है, जिससे आम लोगों के सामने धार्मिक अनुष्ठानों और मतदाता सूची संबंधी कार्यों के बीच समय प्रबंधन की चुनौती खड़ी हो सकती है।
रूपेश दुबे ने दावा किया कि देश में 13 करोड़ 37 लाख और छत्तीसगढ़ में 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटना लोकतंत्र के लिए गंभीर विषय है। उनके अनुसार, निर्वाचन आयोग का विशेष अभियान यह सवाल भी खड़ा करता है कि यदि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाना था, तो अब दोबारा सुधार अभियान चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
प्रपत्र-6 और प्रपत्र-7 को लेकर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 में बदलाव कर एनेक्सचर-डी भरने की अनिवार्यता लागू की गई, जिससे नए मतदाताओं के पंजीकरण में परेशानी हुई। उन्होंने निर्वाचन आयुक्तों के बीच कथित मतभेदों और दर्ज आपत्तियों का हवाला देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्रपत्र-7 का दुरुपयोग कर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन दिए गए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनके अनुसार प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
पितृपक्ष और नवरात्रि में अभियान पर आपत्ति
रूपेश दुबे ने कहा कि 5 से 31 अक्टूबर तक निर्धारित विशेष अभियान के दौरान मतदाताओं को अपने नाम खोजने, त्रुटियों में सुधार कराने और आवश्यक होने पर नाम जुड़वाने के लिए बूथों तक जाना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अभियान की समय-सारणी आम लोगों की धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक दायित्वों को ध्यान में रखकर तय नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में अपना नाम सुनिश्चित करना प्रत्येक नागरिक के लिए जरूरी है, लेकिन इसके लिए पर्याप्त समय, सरल प्रक्रिया और सुविधाजनक व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। दुबे ने निर्वाचन आयोग से अभियान की व्यवस्था की समीक्षा करने, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों में पारदर्शिता बरतने और पात्र नागरिकों को अपना नाम जुड़वाने तथा त्रुटियां सुधारने का पर्याप्त अवसर देने की मांग की।
रूपेश दुबे, प्रवक्ता, प्रदेश कांग्रेस कमेटी, छत्तीसगढ़।



