खैरागढ़। जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर से 100 मीटर की दूरी तक पांच से अधिक लोगों के एकत्रित होने, रैली, धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी पर रोक लगाने के आदेश ने जिले में सियासी हलचल मचा दी है। इस आदेश को क्षेत्रीय विधायक श्रीमती यशोदा नीलांबर वर्मा ने “जनविरोधी और तानाशाही” करार दिया है।
विधायक वर्मा ने कहा कि यह आदेश सीधे तौर पर किसानों और आम जनता की आवाज को दबाने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह निर्णय भाजपा सरकार को बचाने के लिए लिया गया है? उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी अन्य जिले में ऐसा आदेश लागू नहीं है, फिर केवल खैरागढ़ में ही क्यों?
वर्मा ने कहा कि जनता पहले से ही बिजली दरों में बढ़ोतरी, खराब सड़कों, बढ़ती महंगाई और फसल मुआवजा जैसे मुद्दों से त्रस्त है। अब जब लोग अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर कार्यालय आते हैं तो उन्हें 100 मीटर दूर रोक देना प्रशासन की तानाशाही है। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा के लिए ही नया जिला बनाया गया था, लेकिन अब जनता की आवाज ही नहीं सुनी जा रही।
विधायक ने बताया कि 4 नवंबर को किसानों ने उनके नेतृत्व में जिला कार्यालय पहुंचकर खराब फसल, बीमा भुगतान और गिरदावरी अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण ज्ञापन देने की कोशिश की थी, लेकिन कलेक्टर किसानों से मिलने नहीं आए। इससे नाराज किसान घंटों तक कलेक्ट्रेट के बाहर बैठे रहे।
वर्मा ने कहा कि कलेक्टर जनता का सेवक होता है, जनता की आवाज को दबाने का अधिकार उसे नहीं है। उन्होंने बताया कि वह इस आदेश के विरोध में राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसे तत्काल निरस्त करने की मांग करेंगी। साथ ही कहा कि यदि प्रशासन नहीं चेता, तो किसानों के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।


