खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में पान की करीब 250 वर्ष पुरानी पारंपरिक खेती को नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने पहल शुरू की है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने छुईखदान स्थित रानी अवंती बाई लोधी कृषि महाविद्यालय परिसर में जिले की पहली ‘पान दुकान’ का शुभारंभ किया। यह पहल जिला प्रशासन, पान अनुसंधान केंद्र और कृषि महाविद्यालय के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है।
कलेक्टर ने कहा कि समय के साथ छुईखदान में पान की खेती का रकबा और उत्पादन कम हुआ, जिसे पुनर्जीवित करने के लिए पिछले एक वर्ष से किसानों के साथ लगातार काम किया जा रहा है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद कई किसानों ने दोबारा पान की खेती शुरू की है।
पान की खेती को बाजार से जोड़ने के लिए महिला स्व-सहायता समूहों को पान आधारित मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। पान दुकान में पान चॉकलेट, पान अप्पे, पान चीला, पान सैंडविच, पान पाउडर, पान रिफ्रेश और पान लड्डू सहित विभिन्न उत्पाद उपलब्ध होंगे।
जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप छुईखदान में पान कैफे शुरू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इससे स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने और किसानों, युवाओं तथा महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
पान दुकान का संचालन सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य छुईखदान के पान और उससे जुड़े उत्पादों को प्रदेश व देश स्तर पर नई पहचान दिलाना है।



